- व्यवस्थाविवरण 18 BSB ↗
हर परिवार वह बेचैन प्रश्न जानता है जो तब उठता है जब वह एक व्यक्ति जिस पर सब निर्भर थे, जाने वाला होता है: अब हम किससे पूछेंगे? बहुत से भारतीय घरों में कठिन समय में इसका उत्तर होता है किसी ऐसे व्यक्ति के पास जाना जो हस्तरेखा, कुंडली या शकुन पढ़ता है। इस्राएल यहाँ इसी प्रश्न का सामना करता है। मूसा, वह व्यक्ति जिसने परमेश्वर से आमने-सामने बात की, मरने वाला है। जब एक घबराई हुई प्रजा भविष्य जानना चाहेगी तो वह क्या करेगी? यह अध्याय अनदेखे को पढ़ने की हर पिछली गली के तरीके के दरवाज़े बंद कर देता है, और एक सामने का दरवाज़ा खोलता है: परमेश्वर एक नबी भेजेगा।
कहानी में यह कहाँ है: यह तीसरा अंक है — परमेश्वर इस्राएल को अपनी प्रजा के रूप में गढ़ रहा है — उस मोड़ पर जहाँ नेतृत्व सौंपा जा रहा है। व्यवस्थाविवरण 16–18 उन पदों को सामने रखता है जो मूसा के बाद इस्राएल की अगुवाई करेंगे: न्यायाधीश, राजा, याजक और लेवीय, और अब नबी। 'मेरे समान एक नबी' की प्रतिज्ञा सदियों तक गूँजेगी। बाद के यहूदी पाठकों ने इसमें नबियों की पूरी परंपरा सुनी; नया नियम इसका अंतिम उत्तर यीशु में सुनता है (प्रेरितों के काम 3:22)।
यह अध्याय क्या कर रहा है: यह तय करना कि मूसा के जाने के बाद इस्राएल परमेश्वर की बात कैसे सुनेगा: भावी कहने या मरे हुओं से संपर्क करने से नहीं, बल्कि एक ऐसे नबी के द्वारा जिसे परमेश्वर स्वयं उठाता है, और जिसके वचन सच सिद्ध होने चाहिए।
- 18:1–8 — याजकों और लेवियों को अपनी कोई भूमि नहीं मिलती। उनका भाग स्वयं यहोवा है, जो बलिदानों और पहली उपज के निर्धारित अंशों के रूप में उन्हें मिलता है। जो लेवीय केंद्रीय पवित्रस्थान पर आ जाए, उसे वहाँ के दूसरों की तरह भोजन मिले।
- 18:9–14 — देश की जातियों से ली गई वर्जित प्रथाओं की एक स्पष्ट सूची: बच्चों को आग में से निकालना, भावी कहना, शकुन विचारना, टोना, मंत्र फूँकना, आत्माओं से संपर्क करने वाले, और मरे हुओं को बुलाना। इस्राएल को परमेश्वर के सामने 'निर्दोष' रहना है, गुप्त विद्याओं से भविष्य को संभालने का प्रयास नहीं करना है।
- 18:15–19 — सीनै पर लोगों ने विनती की थी कि उन्हें परमेश्वर की भयानक आवाज़ सीधे न सुननी पड़े (निर्गमन 20)। परमेश्वर ने यह माना, और अब प्रतिज्ञा करता है कि उन्हीं में से मूसा के समान एक नबी उठाएगा, जिसके मुँह में परमेश्वर के वचन होंगे। जो कोई उस नबी की उपेक्षा करेगा, उसे परमेश्वर को उत्तर देना होगा।
- 18:20–22 — एक चेतावनी और एक कसौटी: जो नबी किसी दूसरे देवता के नाम से बोले, या झूठे ढंग से परमेश्वर का अधिकार होने का दावा करे, वह मार डाला जाए। यदि किसी नबी का वचन पूरा न हो, तो परमेश्वर ने उसे नहीं भेजा, और लोगों को उससे डरने की आवश्यकता नहीं।
मुख्य पद: व्यवस्थाविवरण 18:15 · तो क्या: कुंडली, शकुन और गुप्त ज्ञान का दावा करने वाले लोगों की ओर खिंचाव आज भी उतना ही प्रबल है जितना तब था, क्योंकि अनिश्चितता डरावनी होती है। यह अध्याय इस्राएल को कल का पूरा ज्ञान देने की प्रतिज्ञा नहीं करता; यह एक भरोसेमंद आवाज़ की प्रतिज्ञा करता है। यह एक ठोस कसौटी भी देता है जो आज भी हर उस व्यक्ति पर लागू होती है जो परमेश्वर की ओर से बोलने का दावा करता है: क्या उसकी कही बातें वास्तव में पूरी होती हैं?