मसौदा अनुवाद. मातृभाषी ईसाइयों के सुधार स्वागत हैं। पद-पाठ KJV (अंग्रेज़ी) में रहता है।
भजन संहिता 41 — क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है
क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा। यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा। जब वह व्याधि के मारे शय्या पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा। मैंने कहा, हे यहोवा, मुझ पर दया कर; मुझ को चंगा कर। मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उसने भी मेरे विरुद्ध लात उठाई है। इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है। आमीन, फिर आमीन।
“क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।”
— भजन संहिता 41:1
- v.1-3 धन्य है वह जो कंगाल की सुधि रखता है
- v.4-12 विश्वासघात में की गई पुकार
- v.13 समापन स्तुति-वचन
यूहन्ना 13:18 में मसीह ने यहूदा के विषय में इसे उद्धृत किया। मेज़ पर हुआ विश्वासघात इसी पद में पहले से लिखा था।
विश्वासघात सहनेवाले विश्वासी के लिये एक सांत्वना। स्वयं मसीह ने इसी घाव को सहते हुए यह भजन उद्धृत किया।
पद 1 एक दैनिक अनुशासन है। कंगाल की सुधि रखिए; यह क्रिया सोच-समझकर ध्यान देने की है, लापरवाही से दी गई राहत की नहीं। आशीष लौटकर आती है।
पद 9 अन्तिम भोज में पूरा हुआ। यहूदा ने, जो मसीह की रोटी खाता था, उन पर लात उठाई। इस भजन ने उस विश्वासघात का पहले से संकेत दिया।
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कंगाल की सुधि रखता है। यह क्रिया सोच-समझकर ध्यान देने का भाव रखती है, केवल बचे-खुचे सिक्के देने की उदारता का नहीं।
एक पारस्परिकता। जो कंगाल की सुधि रखता है, उसे उसकी अपनी विपत्ति के समय परमेश्वर बचाता है।