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मसौदा अनुवाद. मातृभाषी ईसाइयों के सुधार स्वागत हैं। पद-पाठ KJV (अंग्रेज़ी) में रहता है।

ज्ञान-साहित्य · सभोपदेशक

सभोपदेशक 6 — मनुष्यों पर भारी एक बुराई

सारांश

एक बुराई जो मैंने सूर्य के नीचे देखी है, वह मनुष्यों को बहुत भारी लगती है। किसी मनुष्य को परमेश्वर धन-सम्पत्ति और प्रतिष्ठा यहाँ तक देता है कि जो कुछ उसका मन चाहता है उसे उसकी कुछ भी घटी नहीं होती, तो भी परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता। यदि किसी पुरुष के सौ पुत्र हों, और वह बहुत वर्ष जीवित रहे... परन्तु न उसका प्राण प्रसन्न रहे... तो मैं कहता हूँ कि ऐसे मनुष्य से अधूरे समय का जन्मा हुआ बच्चा उत्तम है। बुद्धिमान को मूर्ख से क्या अधिक लाभ है? मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तो भी उसका मन नहीं भरता। जो कुछ हुआ है उसका नाम पहले ही रखा जा चुका है।

मुख्य पद

“मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तो भी उसका मन नहीं भरता।”

— सभोपदेशक 6:7

रूपरेखा
  1. v.1-6 आनन्द-रहित धन
  2. v.7-12 न भरनेवाली भूख; मनुष्य का अज्ञान
पद-दर-पद
2 किसी मनुष्य को परमेश्वर धन-सम्पत्ति और प्रतिष्ठा यहाँ तक देता है कि जो कुछ उसका मन चाहता है उसे उसकी कुछ भी घटी नहीं होती, तो भी परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता, कोई दूसरा ही उसे खाता है; यह व्यर्थ और भयानक दुःख है।

असन्तुष्ट करनेवाली बहुतायत का निदान। सब कुछ होना और उसका आनन्द न ले पाना ऐसा दुःख है जिसकी गरीब कल्पना भी नहीं कर सकता।

परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता। आनन्द लेने की क्षमता स्वयं एक दान है। उसके बिना साधन धूल खाते पड़े रहते हैं।

सम्बन्धित संदर्भ सभोपदेशक 5:19 · लूका 12:20 · अय्यूब 27:16-17 · भजन संहिता 39:6
7 मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तो भी उसका मन नहीं भरता।

शरीर अपना पेट भरने के लिए परिश्रम करता है, और भूख फिर लौट आती है। यह चक्र संकेत देता है कि कोई बड़ी बात बिगड़ी हुई है।

यह पद पेट से आगे संकेत करता है। प्राण की गहरी भूख किसी ऐसी वस्तु से तृप्त नहीं होती जो पेट में समा सके।

सम्बन्धित संदर्भ यूहन्ना 4:13-14 · यूहन्ना 6:35 · मत्ती 4:4 · यशायाह 55:1-2
मुख्य सिद्धान्त
आनन्द लेने की सामर्थ्य के बिना धन
सभोपदेशक 6:2 · सभोपदेशक 5:19
मनुष्य की न भरनेवाली भूख
सभोपदेशक 6:7 · यूहन्ना 4:13-14 · यूहन्ना 6:35
जीवन में लागू करना

पद 7 की न भरनेवाली भूख एक संकेत-चिह्न है। यदि आप जो कुछ भी मुँह में डालते हैं, उसके बाद भी भूखे रह जाते हैं, तो वह भूख किसी ऐसी वस्तु की है जिस तक मुँह नहीं पहुँच सकता। ऊपर की ओर देखिए।

इस अध्याय में मसीह

मसीह जीवन की रोटी हैं (यूहन्ना 6:35)। न भरनेवाली भूख का इस अध्याय का निदान उनमें अपना उपचार पाता है, जो सबसे गहरी भूख को तृप्त करते हैं।

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