त्रावणकोर दरबार के एक अधिकारी देवसहायम पिल्लै ने धर्मांतरण किया और एक ऐसा नाम अपनाया जिसका अर्थ है “परमेश्वर मेरा सहायक है।” कड़े विरोध के कारण 1752 में उनकी मृत्यु हुई। 2022 में उन्हें कैथोलिक कलीसिया का संत घोषित किया गया — संत घोषित होने वाले पहले भारतीय ग़ैर-पादरी।
आधुनिक कलीसिया और समाचार स्रोत; उल्लेखित, पुनरुत्पादित नहीं।
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