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मसौदा अनुवाद. मातृभाषी ईसाइयों के सुधार स्वागत हैं। पद-पाठ KJV (अंग्रेज़ी) में रहता है।

ज्ञान-साहित्य · भजन संहिता

भजन संहिता 10 — हे यहोवा तू क्यों दूर खड़ा रहता है?

सारांश

हे यहोवा तू क्यों दूर खड़ा रहता है? संकट के समय में क्यों छिपा रहता है? दुष्टों के अहंकार के कारण दीन पर अत्याचार होते हैं। दुष्ट अपने अहंकार में परमेश्वर को नहीं खोजता; उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। उठ, हे यहोवा; अपना हाथ बढ़ा; और दीनों को न भूल। यहोवा अनन्तकाल के लिये महाराज है; उसके देश में से जाति-जाति लोग नाश हो गए हैं। हे यहोवा, तूने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है। कि अनाथ और पिसे हुए का न्याय करे, ताकि मनुष्य जो मिट्टी से बना है फिर भय दिखाने न पाए।

मुख्य पद

“हे यहोवा, तूने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है; तू उनका मन दृढ़ करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा”

— भजन संहिता 10:17

रूपरेखा
  1. v.1-11 दुष्ट की दिखावटी सफलता
  2. v.12-18 परमेश्वर का उत्तर
पद-दर-पद
4 दुष्ट अपने अहंकार में परमेश्वर को नहीं खोजता; उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं।

उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। हृदय की नास्तिकता। दुष्ट ऐसे चलता है मानो परमेश्वर का अस्तित्व ही न हो; अहंकार खोजने का मार्ग रोक देता है।

एक निदान। जहाँ प्रतिदिन के मानसिक आवागमन में परमेश्वर नहीं होता, वहाँ हृदय दुष्ट की मुद्रा में होता है।

सम्बन्धित संदर्भ रोमियों 1:21 · भजन संहिता 14:1 · इफिसियों 2:12 · अय्यूब 21:14
17 हे यहोवा, तूने नम्र लोगों की अभिलाषा सुनी है; तू उनका मन दृढ़ करेगा, तू कान लगाकर सुनेगा

अंग्रेज़ी (KJV) पाठ में: उनका मन तैयार करेगा। परमेश्वर स्वयं उन अभिलाषाओं को आकार देता है जिन्हें वह सुनता है। नम्र लोगों को प्रार्थना की योजना बनाने के चरण में भी सहायता मिलती है।

प्रार्थना-जीवन की गहराई में छिपा एक अनुग्रह। आत्मा हृदय को तैयार करता है; पिता तैयार की गई पुकार को सुनता है।

सम्बन्धित संदर्भ रोमियों 8:26-27 · नीतिवचन 16:1 · याकूब 4:6 · भजन संहिता 145:18
मुख्य सिद्धान्त
दुष्ट के विचारों से परमेश्वर का अनुपस्थित होना
भजन संहिता 10:4 · रोमियों 1:21 · अय्यूब 21:14
सुनी जानेवाली प्रार्थना के लिये तैयार किए गए हृदय
भजन संहिता 10:17 · रोमियों 8:26-27 · नीतिवचन 16:1
जीवन में लागू करना

पद 4 आपकी जाँच करता है। आपके प्रतिदिन के विचारों में परमेश्वर कितनी बार आता है? यदि कभी-कभार ही, तो अध्याय का निदान आप पर लागू होता है। इसका उपचार है परमेश्वर-सम्बन्धी विचारों को दिन भर में बुनते रहने का अनुशासन।

इस अध्याय में मसीह

मसीह अनन्तकाल के लिये महाराज हैं (पद 16)। उनके अधीन दुष्ट के दिन गिने हुए हैं; नम्र लोगों की प्रार्थना उनके कान तक पहुँचती है।

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